रविवार, 4 अगस्त 2013

आरोग्य का रहस्य

हमें निरोग रहने के लिए अपने आहार का ध्यान रखना चाहिए आहार से अभिप्राय केवल भोजन से नहीं बल्कि इसके अतिरिक्त सभी इन्द्रियों के आहार से हैहम आँखों से क्या देखते हैं कानो से क्या सुनते हैं मन में क्या सोचते हैं । प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति मे,  जिस प्रकार तन मे कूढ़ा इकठा होने पर रोगी हो जाते हैं , उसी प्रकार मन मे स्वच्छ्ता  न रहने  पर अर्थात मन मे किसी के प्रति ईर्ष्या द्वेष क्रोध ,किसी की निंदा करने पर भी हम रोगी हो जाते हैं। किसी वस्तु या व्यक्ति  विशेष मे  दीर्घ काल तक दोष देखते रहने पर हमें हड्डियों मे दर्द होना शुरू हो जाता है , जो बाद मे गठिया  रोग बन जाता है. जब हम छोटी छोटी बातों  पर गुस्सा होते हैं तो एक समय के बाद उच्च  रक्त चाप हो जाता है, जो आगे जाकर पैरालिसिस  तक भी हो सकता है।  जोर से चिला कर गुस्सा करने से साँस संबधी बीमारियाँ हो जाती है. । हर बात पर असतुन्ष्ठ  रहने पर , प्रभु की कृपा-दृष्टि से आंखे  मूँद कर दुखी रहने पर त्वचा संबधी रोग हो सकते हैं।  प्रभु ने जैसा घर,पति पत्नी, बच्चे ,सास ससुर,देवर जेठ , समधी  दादी, नानी, माता पिता और जो भी दिया है. , उस मे  हमें प्रसन्न रहने चाहिए। तभी जो हम स्वस्थ जीवन व्यतींत कर पायेंगे। 

शनिवार, 7 मई 2011

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

BE HAPPY............




Luminous environment brings hope..Every day is a celebration for us. Forget sorrows of life and be happy.

प्रकाशयुक्त वातावरण आशा लाता है .. हर दिन हमारे लिए एक उत्सव है. जीवन के दुखों को भूल जाओ और खुश रहो.

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

वेदना



दिनांक २.२.२०११

दोपहर खाने के बाद एक सहेली से बतियाते अचानक हम दोनों की आँखों से आंसू बहने लगे अपने -अपने पिता जी को स्मरण करके । कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि हम बेटिओं को पिता जीके साथ अल्पकाल के लिए ही रहना होता है। " मायके में जब हमजायेंगे तो पिता जी वहां नहीं होंगे " इस सत्य पर विश्वास करना असंभव होता है । हर बार मन कहता है कि पिताजी अभी हमारे बीच ही हैं, जरूर मिलेंगे हम उनसे । और यही आशा वेदना बन जाती है मायके जाकर ....,.

शनिवार, 6 नवंबर 2010

दीपावली, कितनी शुभ ?

आज दीपावली का शुभ पर्व है , ५ नवम्बर ,२०१० , इस समय रात्रि के १२ बजकर ४० मिनट हो गए हैं । लेकिन पटाखों की गढ़गढ़ाहत कानो में लगातार सुनायी दे रही है॥
क्या हमारी भारत की माताएं ऐसी विस्फोटक ध्वनि सुनकर आनंदित हो रहीं है, या पुत्रों को रोक नहीं पा रही हैं या
उनके इस साहसिक कार्य को देख गर्व अनुभव कर रही हैं ?
लाखों वृद्ध -जन साँस लेने में कष्ट झेल रहे होंगे । लाखों नवजात शिशु प्रदूषित वायु निगल रहे होंगे और हमारे भारत की युवा पीडी
धन को बर्बाद कर एवं ध्वनि व् वायु प्रदूषण फैला कर उल्लास मना रही है । क्या सरकार जनहित में कोई कानून पारित नहीं कर सकती ? क्या वह अपने देशवासियों की दयनीय स्थिति से अनभिज्ञ है !
आईये , आपको राजधानी दिल्ली की कुछ झलकियाँ दिखाते हैं, जहाँ हाल ही में राष्ट्रमंडल खेलों २०१० का आयोजन हुआ था ।







क्या आपके और हमारे दीपावली के दिन पटाखें जलाने से इनके जीवन में कोई सुधार आएगा ? निसंदेह नहीं, तोफिर इस अल्पकालिक प्रसन्नता हेतु स्वयं एवं भावी पीड़ी के लिए वातावरण को प्रदूषित क्यूँ करें !

शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

दिल्ली २०१० कामनवेल्थ खेलों का समापन समारोह

यदि आप किसी कारणवश , १४ अक्टूबर ,२०१० को १९वे कामनवेल्थ खेलों का समापन -समारोह नहीं देख सके ,तोनिराश मत होईये
दूरदर्शन टी वी चैनल पर प्रसारित समापन -समारोह एवम २०१४- कामनवेल्थ खेलों का मेज़बान देश -स्काटलैंड की कुछ झलकियाँ का आनंद उठायें ,
साभार दूरदर्शन टी वी
चैनेल।






शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

मेरे अम्बर की दुनिया

अम्बर की दुनिया
गौरैया, छोटी चिडिया

गौरैया तो नज़र ही नही आती है, जब से इन्तरनेत की तारो ने जाल बिछाया है.
मेरे बचपन की यादे, रोश्न्दानो मे गौरैया के घोसले, उनके अन्डे , फिर छोटी चिडिया का दिख्नना, ची-ची की आवाज़, बीथ का कापी की कवर पर गिर जाना. सब सपना सा लगता है. हमारी प्रगति ने हमसे गौरैया छीन ली. हमे बच्चो को दिखाने के लिए केवल उस का चित्र ही रह गया है.


कबूतर

दिल्ली अब कबूतरो का शहर बन गया है. एक समय था जब कबूतर प्रेम का सन्देश-वाहक होते थे. प्रेमी-प्रेमिकाये अपने पत्र इनके पैरो मे बान्ध कर उन तक पहुचाते थे. आज -मेल के युग मे , कबूतर फुर्सत मे है, अपने कबीलो के साथ खाते-पीते मौज मनाते है. मैने कबूतरो का सन्सार देखा है. आप भी देखिये.





































१९वा कामन्वेल्थ खेलो की मेज़्बान- दिल्ली

दिल्ली , भारत की राजधानी , जो १९वा कामन्वेल्थ खेलो की मेज़्बान अति सुन्दर बन गयी है. सभी देश्वासियो. से अनुरोध है कि इसे सदैव साफ़ सुथरा रख्ने . मैने १४ अकतूबर २०१० को दिल्ली का दौरा किया ,जो देखा उस की झलकिया आप भी देखिये.









बुधवार, 29 सितंबर 2010

मेरा देश महान


मेरा प्रभ उससे अधिक महान है
कोई एक पत्ता भी नहीं बना सकता एस पैड का